संगीत के सुरों से स्वच्छता का आलाप

संगीत परमब्रम्ह है… संगीत आत्मा को तृप्त करता है और संगीत से मन प्रफुल्लित करता है… संगीत से स्वयं को भीतर से आनंदित करने की बात होती है परंतु जब संगीत से न केवल भीतर की बल्कि अपने आसपास के क्षेत्र की गंदगी दूर करने की बात हो तब आश्चर्य ही होता है।

इंदौर देश का नंबर वन स्वच्छ शहर और वह भी लगातार तीन वर्षो तक स्वच्छ शहर का तमगा लिए बड़े शान से हो हल्ला कर रहा है। इसमें स्वच्छता को लेकर आधुनिक मशीनरी का प्रयोग किया गया… परंतु इसमें संगीत का भी बड़ा योगदान रहा है। शुरुआती दौर में थीम सांग बना और घर के आसपास और मोहल्ले में स्वच्छता को लेकर जब गली गली में रेकार्डेड गीत बजे तब अलग तरह का ही उत्साह बना। प्रख्यात गायक शान ने गाये और हृषिकेश पांडेय द्वारा स्वरबद्ध किये इन गीतों ने खूब प्रभाव डाला… पहले कई लोगो को अजीब सा भी लगा कि कचरा साफ करने के लिए संगीत… परंतु इन थीम सांग्स ने आम जनता से लेकर छोटे बच्चों तक को खूब प्रेरित किया। इन गीतों को इस प्रकार से कंपोज किया गया था कि वे सहज और सरल रहे और एकदम से लोगो की जुबां पर चढ़े और साथ में लोगो को प्रेरित भी करे।

बच्चे नाचने लगते थे

शुरुआती दौर में नगर निगम की गाड़िया जब अपने साउंड सिस्टम पर इन गीतों को बजाती थी तब गली मोहल्ले के छोटे बच्चे इन गीतों पर गाड़ी के आगे डांस करने लगते थे। बच्चों का उत्साह देखकर सही मायने में अलग सा माहौल बनने लगा। यही नहीं कई लोगो ने बारात में भी बैंड पर इस गाने को बजवाया।

इस गीत की आदत सी बन गई

लगातार बजते रहने और सीधी और सरल धुन होने के कारण सुबह से शाम तक शहर की मुख्य सड़को से लेकर गलियों में ये गीत गुंजते रहते थे। जब शहर को सफाई में हैट्रिक लगानी थी तब काफी पहले से इसकी तैयारी हो चुकी थी और हैट्रिक लगाएंगे इस गीत ने अपना अलग ही काम किया। लोगो के मन में इस गीत ने यह बात जंचा दी की हमें तीसरी बार भी नम्बर वन आना ही है और हुआ भी यही इंदौर तीसरी बार नम्बर वन आया।

इतना ही नहीं इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन (आईएमए) के वार्षिक कार्यक्रम में जहां पर देशभर के कारपोरेट जगत के नामचीन लोग आते है। उन लोगो के सामने इंदौर के हायजीन इंजिनियर्स ने हेट्रिक लगाएंगे इस गीत पर नृत्य भी किया। इस प्रकार की प्रस्तुति देखकर भी कारपोरेट जगत हतप्रभ रह गया कि हैट्रिक गीत पर इस प्रकार का नृत्य भी संभव है लिहाजा सभी ने स्टेडिंग ओवेशन भी दिया।

हायजिन इंजिनियर्स की मेहनत के साथ संगीत का भी इंदौर की स्वच्छता में अपना अलग ही योगदान रहा।

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